आग बहे तेरी रग में
तुझसा कहाँ कोई जग में
है वक़्त का तू ही तो पहला पहर
तू आँख जो खोले तो ढाए कहर

(Sukhwinder Singh)
तो बोलो हर हर हर
तो बोलो हर हर हर
तो बोलो हर हर हर
तो बोलो हर हर हर

(Badshah)
आदि ना अंत है उसका
वो सबका ना इनका उनका
वोही है माला
वोही है मनका
मस्त मलंग वो अपनी धुन का

अंतर मंतर तंतर जागी
है सर्वत्र के स्वाभिमानी
मृत्युंजय है महा विनाशी
ओमकार है इसी की वाणी
इसी की इसी की इसी की वाणी
इसी की इसी की इसी की वाणी

भांग धतुरा बेल का पत्ता
तीनो लोक इसी की सत्ता
विष पीकर भी अडिग अमर है
महादेव हर हर है जपता

वोही शून्य है वोही इकाई
वोही शून्य है वोही इकाई
वोही शून्य है वोही इकाई
जिसके भीतर बस्ता शिवा है

तो बोलो हर हर हर
तो बोलो हर हर हर

(Megha Dalton)
अघोरान्ना परो मंत्र
नास्ति तत्त्वं गुरोः पारा
महादेव ..

नागेन्द्र हराया त्रिलोचानाया
बस्मंगा रागाया महेस्वराया
निथ्याया शुधाया दिगम्बराया
तस्मै॑काराया नमशिवाया

शिव, रक्शमाम
शिव, पाहिमाम
शिव, पाहिमाम

शिव, रक्शमाम
शिव, पाहिमाम
शिव, पाहिमाम

महादेव जी तवं पाहिमाम
शर्नागातम तवं पाहिमाम
अहम् रक्शमाम
शिव पाहिमाम शिव !

(Badshah)
आँख मूँद कर देख रहा है
साथ समय के खेल रहा है
महादेव महा एकाकी
जिसके लिए जगत है झांकी

जटा में गंगा
चाँद मुकुट है
सोम्य कभी
कभी बड़ा विकट है
आग से जलना है कैलाशी
शक्ति जिसकी दर्द की प्यासी
है प्यासी, हाँ प्यासी

राम भी उसका, रावन उसका
जीवन उसका मरण भी उसका
तांडव है और ध्यान भी वो है
अज्ञानी का ज्ञान भी वो है

आँख तीसरी जब ये खोले
हिले धरा और स्वर्ग भी डोले

गूँज उठे हर दिशा क्षितिज में
नंद उसी का बम बम भोले

वही शून्य है वोही इकाई
वही शून्य है वोही इकाई
वही शून्य है वोही इकाई
जिसके भीतर बसा शिवा है

(Mohit Chauhan)
तू ही शिवा तुझमे ही शिवा
कोई नहीं यहां तेरे सिवा
उड़ा राख अग्नि को ज्वाला तू कर
मिटा दे अँधेरे तू बन के सेहर

(Sukhwinder-Badshah)
तो बोलो हर हर हर
जा जा कैलाश जा कर विनाश 
जा जा कैलाश जा कर विनाश 
जा जा कैलाश जा कर विनाश
जा जा कैलाश कर सर्वनाश

तो बोलो हर हर हर
जा जा कैलाश जा कर विनाश 
जा जा कैलाश जा कर विनाश 
जा जा कैलाश जा कर विनाश
जा जा कैलाश कर सर्वनाश

आँख मूँद कर देख रहा है
साथ समय के खेल रहा है
महादेव महा एकाकी
जिसके लिए जगत है झांकी
जाता में गंगा , चाँद मुकुट है
सौम्य कभी , कभी बड़ा विकट है
आँख से जन्मा है कैलाशी
शक्ति जिसकी दरस की प्यासी

(तोह बोलो हर हर हर )

यक्षस्वरूपाया जट्टाधराय
पिनाकाहस्थाथाया संथानाय
दिव्याया देवाया दिगम्बराय
तस्मैयकाराय नमः शिवाय

Lyrics by Sandeep Shrivastava